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स्मृति दिवस विशेष:पत्रकारिता के पुरोधा गुरुदेव कश्यप कला नगरी के बेनाम योद्धा..

संस्मरण / सम्पादकीय
स्मृति दिवस विशेष
03 वां स्मृति दिवस पर
11 अगस्त 2019

पत्रकारिता के पुरोधा गुरुदेव कश्यप कला नगरी के बेनाम योद्धा

रायगढ़ कला नगरी अपने आप में एक अलग नाम है इस नगरी की गाथा का जितना भी बखान करें कम है सेठ किरोड़ीमल जी , राजा चक्रधर सिंह और स्वतन्त्रा संग्राम सेनानियों ,साहित्यकारों का यह गढ़ है रायगढ़ उसी में से एक बेनाम योद्धा हैं साहित्यकार ,पत्रकार गुरुदेव कश्यप जी जो रायगढ़ की भूमि पर 1934 को जन्म लिए थे ।
छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के पुरोधा व वरिष्ठ कलमकार गुरुदेव कश्यप 11 अगस्त 2016 को जिंदल अस्पताल में अंतिम सांसे ली। देर रात उनके महाप्रयाण की खबर से शहर में शोक की लहर फैल गई। गुरुवार दोपहर कयाघाट स्थित मुक्तिधान में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके अंतिम दर्शन पाने भारी संख्या में पत्रकार व शहरवासी, साहित्यकार आदि का हुजूम उमड़ पड़ा।

82 वर्षीय गुरुदेव कश्यप अंचल की पत्रकारिता को नया आयाम देने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 35 वर्षों से अपनी कलम की लेखनी से लोगों को प्रभावित किया। अंचल में पत्रकारिता को एक नया आयाम देने वाले वाले गुरुदेव कश्यप ने शहर में दैनिक अखबार का प्रकाशन 1986 में बेहद कम संसाधनों के बीच मजबूत पकड़ के साथ शुरू किया था। समसामयिक, राजनीति या विचार या विज्ञप्ति किसी भी रूप में अपनी लेखनी के बल पर उसमें एक नया जीवन डालने में माहिर गुरुदेव के आकस्मिक निधन से समूचा शहर हतप्रभ था। छह दिन पूर्व पत्नी का निधन हुआ था उनके विक्षोभ में वह इस कदर शोकमग्न हुए कि अस्वस्थ्य हो गए और उन्हें जिंदल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां बीती रात उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पुत्र अपनी मां की अस्थि विसर्जित करने गए थे जो देर रात ही लौटे हैं। गुरुदेव के निधन से पत्रकारिता जगत को भारी क्षति हुई है।

पत्रकारिता के क्षेत्र में 1952 से 1974 तक गुरुदेव का साधना क्षेत्र रायपुर रहा है। उन्होंने महाकौशल कोलकाता से प्रकाशित दैनिक में भी संपादकीय विभाग में सेवाएं दी। 1974 के आसपास बिलासपुर संभाग के प्रथम दैनिक बिलासपुर टाईम्स के अलावा बिलासपुर से प्रकाशित होने वाले दैनिक का संपादन भी किया। इसके बाद वह 1981 में अपने गृह नगर रायगढ़ से पत्रकारिता की शुरुआत की।

■ अनेक मंच पर हुए पुरस्कृत….

छत्तीसगढ़ समेत अंचल में पत्रकारिता के पुरोधा गुरुदेव कश्यप कलम के धनी थे। वह कविता के क्षेत्र में भी एक सशक्त हस्ताक्षर माने जाते हैं। उनका काव्य संग्रह धूप का एक दिन, अभिशप्त उत्कल, मीठे कनेर का दरख्त, नैवेद्य आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा उन्होंने प्रसिद्घ व चर्चित उपन्यासकार ब्लादीमीर नोबोकोव की चर्चित उपन्यास लौलिता का प्रथम हिंदी अनुवाद भी किया। अपनी लेखनी को लेकर उन्हें कई मंचों पर पुरस्कृत किया वही 2015 में चंदू लाल चंद्राकर स्मृति पत्रकारिता सम्मान से भी सम्मानित हुए थे ।
रायगढ़ प्रेस एसोसियन गुरुदेव पत्रकारिता पुरुस्कार के लिए इस वर्ष आवेदन भी कराए थे ।इस तरह गुरुदेव कश्यप पत्रकारिता में एक बड़ा नाम है जो समाज के लिए जिये आज गुरुदेव कश्यप जी की 03 वां स्मृति दिवस है । स्मृति दिवस पर सादर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि
लक्ष्मी नारायण लहरे ” साहिल “
युवा साहित्यकार पत्रकार कोसीर सारंगढ

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