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बलौदाबाजार: मध्यान्ह भोजन में अण्डा खिलाने की बाध्यता नहीं, अण्डे के बदले दूध अथवा समतुल्य पोषण आहार खिलाने का भी प्रावधान…

मध्यान्ह भोजन में अण्डा खिलाने की बाध्यता नहीं, अण्डे के बदले दूध अथवा समतुल्य पोषण आहार खिलाने का भी प्रावधान…

बलौदाबाजार। मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत स्कूली बच्चों को केवल अण्डा खिलाने की बाध्यता नहीं है। अण्डे के बदले दूध अथवा समतुल्य पोषण आहार खिलाने का भी प्रावधान किया गया है। माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य सरकार ने मध्यान्ह भोजन योजना के संबंध में बच्चों का पोषण स्तर सुधारने के लिए सभी जिला कलेक्टरों को सुझाव दिए हैं। जिसके अनुसार मैन्यू में सप्ताह में कम से कम 2 दिन अण्डा/दूध/ समतुल्य पोषण मूल्य का खाद्य पदार्थ समाहित किया जाना चाहिए। यदि बच्चों अथवा पालकों के द्वारा अण्डा की स्वीकारोक्ति न हो तो उसके स्थान पर दूध या अन्य समतुल्य पोषण मूल्य का खाद्य पदार्थ दिया जाना चाहिए। प्रोटीन की मात्रा में वृद्धि के लिए उच्च कोटि के सोया उत्पाद बच्चों को दिया जाना चाहिए। छत्तीसगढ़ बीज एवं कृषि विकास निगम में उचित दर पर सोया उत्पाद उपलब्ध है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसमी फल का भी वितरण मध्यान्ह भोजन योजना में किया जाना है। चावल को बिना माढ़ निकाले पकाये जाने के निर्देश दिए जाने चाहिए, जिससे चावल की कैलोरी में कमी ना हो। उल्लेखनीय है कि वित्तिय वर्ष 2017-18 में राज्य के 27 जिलों में से 19 जिलों एवं 5 केन्द्रीकृत रसोई से 66 स्कूलों में पके हुए भोजन का रैण्डम सेम्पल लेकर जांच कराया गया। जांच में अधिकांश नमूनों में प्रोटीन एवं कैलोरी की मात्रा मानक स्तर से कम पाई गई।

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