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बलौदाबाजार: जिला शिक्षा अधिकारी की अनुमति बिना कोई स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकता: श्री भार्गव , बढ़ाई गई फीस वापस लेने के निर्देश डीईओ ने ली निजी स्कूल प्रबंधन की बैठक..

जिला शिक्षा अधिकारी की अनुमति बिना कोई स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकता: श्री भार्गव , बढ़ाई गई फीस वापस लेने के निर्देश डीईओ ने ली निजी स्कूल प्रबंधन की बैठक..

सहदेव सिंह सिदार 

बलौदाबाजार। जिला शिक्षा अधिकारी श्री ए.के.भार्गव ने कहा कि कोई भी निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकते हैं। उन्हें बाकायदा इसका तार्किक कारण बताते हुए फीस बढ़ाने का अनुमोदन लेना होगा। पालकों से सहमति लेने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी इसका अनुमोदन करेंगे। श्री भार्गव आज यहां जिला ग्रंथालय के सभाकक्ष में निजी स्कूल प्रबंधन की बैठक को सम्बोधित करते हुए इस आशय के निर्देश दिए। बैठक में निजी स्कूलों के संचालक, प्राचार्य एवं उनके प्रतिनिधि उपस्थित थे। उन्होंने बिना अनुमोदन के फीस बढ़ाये कुछ स्कूलों को फीस वृद्धि वापस लेने की सख्त हिदायत दी है। अन्यथा उनकी मान्यता रद्द करने पर विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिले में लगभग 300 निजी स्कूल संचालित हैं, जिनमें हजारों बच्चे नर्सरी से लेकर कक्षा बारहवीं तक पढ़ाई करते हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी श्री भार्गव ने बैठक में साफ कहा कि सरकार के नियम-कायदों का पालन करने की शर्त पर उन्हें स्कूल संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो हमें मजबूर होकर कार्रवाई करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा एवं अपने बच्चों के भविष्य के प्रति जनता जागरूक हो गई है। निजी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पालक अब संगठित भी हो गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए संवेदनशील है। इसमें सभी स्कूलों को सहयोग करना होगा। उन्होंने बच्चों के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता के साथ पेश आने के निर्देश दिए। उन्होंने हाल ही में गरियाबंद में घटित हादसा की जानकारी देते हुए इस तरह की नौबत नहीं आने देने को कहा है। श्री भार्गव ने कहा कि निजी स्कूलों में भी प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा पढ़ाये जाने का प्रावधान है। कुछ स्कूलों में बगैर बी-एड, डीएड के टीचर रखे जाने पर आपत्ति करते हुए समय-सीमा में प्रशिक्षित टीचर रखने को कहा है।
डीईओ ने राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किताबों के बाहर किताब पढ़ाई की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि पालकों पर अनावश्य खर्च का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी स्कूल द्वारा पालक एवं बच्चों को किसी दुकान विशेष से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। वे अपनी सुविधा के अनुरूप किसी भी दुकान से सामान खरीद सकते हैं। उन्होंने वाहनों को भी दुरूस्त और सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। आरटीओ एवं राज्य सरकार के संपूर्ण दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। वाहनों में सीसीटीव्ही कैमरे भी रखा जाए ताकि हर तरह की गतिविधि का रिकार्ड रखा जा सके। श्री भार्गव ने कहा कि बरसात की शुरूआत में स्कूल परिसर एवं शौचालयों में सांप-बिच्छु होने की आशंका रहती है। इसलिए शिक्षक अथवा उनका कर्मचारी स्कूल खुलने के साथ ही पहले अच्छी तरह से निरीक्षण कर लें। उन्होंने पुस्तक वितरण की भी समीक्षा की। श्री भार्गव ने कहा कि आरटीई का दायरा अब कक्षा 8वीं से बढ़ाकर 12 वीं तक कर दिया गया है। निजी स्कूल सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ इनका पालन सुनिश्चित करें। अशासकीय शाला संचालक संघ के अध्यक्ष श्री एस.एम. पाध्येय ने राज्य सरकार के तमाम नियमों एवं दिशा-निर्देशों का पालक करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि केवल पैसा कमाने नहंी बल्कि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा, समाज सुधार एवं सेवा की भावना से निजी स्कूलों का संचालन किया जा रहा है।

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