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बिलाईगढ (बलौदाबाजार ):जिले के टुण्डरी गांव में शासन की आदेश को ताक में रख कर मछुआरा समिति ने बन्धुवा तालाब में मच्छ्ली पकड़ने का जाल डाला. और मच्छ्ली को पकड़ने का प्रयास किया..

जिले के टुण्डरी गांव में शासन की आदेश को ताक में रख कर मछुआरा समिति ने बन्धुवा तालाब में मच्छ्ली पकड़ने का जाल डाला. और मच्छ्ली को पकड़ने का प्रयास किया..

बिलाईगढ़(बलौदाबाजार) ।  बलौदाबाजार जिले के टुण्डरी गांव में शासन की आदेश को ताक में रख कर मछुआरा समिति ने बन्धुवा तालाब में मच्छ्ली पकड़ने का जाल डाला. और मच्छ्ली को पकड़ने का प्रयास किया. साथ ही साथ गांव के लोग इस तालाब में निस्तारी करते है इसके बावजूद भी इसमे केमिकल का भी प्रयोग किया गया.
संचालनालय मछलीपालन छत्तीसगढ़ के द्वारा 10 जून को सूचना जारी हुआ था की 15 जून से 15 अगस्त तक किसी भी तलाब, जलाशय, नदी में मत्स्य खेट पूर्णतः निषिद्ध रहेगा. इस नियम को ताक में रख कर मछुआरा समिति ने टुण्डरी गांव के बंधुआ तालाब में जाल डालकर केज कल्चर किया गया. इस संबध में जब हमने समिति के अध्यक्ष से बात की तो उसने मत्स्य निरीक्षक से परमिशन लेने की बात करते हुए तालाब की सफाई करने के लिए जाल डाला है कहा गया. लेकिन जब हमने अध्यक्ष से ऑफ कैमरा बात किया तो मछली निकलने की बात सामने आई.

मत्स्य निरीक्षक राकेश ऊराऊ ने बताया की शासन का नियम है की 15 जुन से 15 अगस्त तक वर्षा ऋतु क्लोज सीजन होता है. इसमे मछ्लीओ की वंश वृद्घि(प्रजनन) को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें संरक्षण दिया जाता है. अगर मछली के लिए जाल डाला जाता है तो नियम के विरुध है. जब हमने उनसे परमीशन के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने इनकार कर दिया और कहा की मैने किसी को कोई परमीशन नही दी है.

अब सोचने वाली बात है की मछुआरा समिति के अध्यक्ष ने परमीशन नही लिया है तो परमीशन लेने की बात ऑन कैमरा में क्यू कहा. और मत्स्य निरीक्षक इस पर क्या कार्यवाही करते है. या फिर निरीक्षक की मिली भगत से शासन की नियम को तोड़ा जा रहा है.

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