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रायपुर: मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए अस्पतालों में 24 सेक्टर स्तरीय टीम का गठन, स्वास्थ्य अधिकारियों को रहना होगा अलर्ट..

मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए अस्पतालों में 24 सेक्टर स्तरीय टीम का गठन, स्वास्थ्य अधिकारियों को रहना होगा अलर्ट..

रायपुर। स्वास्थ्य विभाग ने जिलों के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारीयों को बीमारियों की रोकथाम के लिए 24 घंटे अलर्ट पर रहने को कहा है. अस्पतालों में मौसमी बीमारियों की दवाएं भी उपलब्ध रखने को कहा गया है. इसके लिए सीएमएचओ कार्यालय से प्रत्येक ब्लॉकों में 6 टीम सेक्टर स्तर पर गठित की गई है. एक सेक्टर में प्राथमिक स्वास्थ केंद्र, उप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रखा गया है जिसमें आरएमओ, स्टाफ नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ,आरएचओ, मितानिन और सुपरवाइजरों सहित डॉक्टरों की टीम गठित कर किसी भी बिमारी के रोकथाम के लिए अलर्ट पर रखा गया है.

ग्रामीणअंचलों में समय-समय पर फॉगिंग करने के निर्देश दिए गए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों के पीएचसी और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में इमरजेंसी सेवा के लिए किट दे दी गई है. इससे सूचना मिलते ही प्रभावित स्थल का सर्वे कर टीम कैम्प लगाकर इलाज करेगी.बारिश में सबसे ज्यादा मौसमी बीमारियों का खतरा बना रहता है. मलेरिया, डेंगू, पीलिया जैसे बीमारियाँ बरसात में सेहत को नुकसान करने के लिए तैयार रहती हैं. रायपुर जिले के सीएमएचओ डॉ केआर सोनवानी ने बताया रायपुर जिले में 27लाख की आबादी है जिसमें 13लाख रायपुर नगर निगम में निवासरत हैं. जिले में चार ब्लॉक धरसींवा,तिल्दा,आरंग, और अभनपुर में गांवों की संख्या 491 है. वहीं जिले में आठ सामुदायिक केन्द्र और 36 पीएचसी हैं.बरसात के मौसम में ज्यादातर लोग बीमारी की चपेट में आते हैं जिसे देखते हुए सभी पीएचसी, सीएचसी, मितानिन, एएनएम सहित अन्य कार्यकर्ताओं को सजग रहने का निर्देश दिया गया है. हर साल जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों में उल्टी-दस्त,बुखार,पीलिया और डेंगू सहित कई बीमारियां फैलती हैं. ऐसे में संबंधित गांवों में कैंप लगाया जाता है.उन्होंने कहा जिले में चमकी बुखार की कोई शिकायत अभी-तक नहीं मिली है. आमतौर पर जापानी बुखार यानी मस्तिक ज्वर को ही चमकी बुखार कहा जाता है . इसके लिए वैक्सिन सहित सभी दवाईयां उपलब्ध है. विलंब होने परपीड़ितों की जान जाने की भी आशंका रहती है, इसलिए पहले से टीम गठित कर सजग रहने की हिदायत दी गई है. सूचना मिलने पर तत्काल किट लेकर मौके पर जाकर उपचार करेगी.

इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग शहरी इलाकों में 20 जगहों पर तथा ग्रामीण अंचलों के हर विकासखंड में दस शिविर लगाऐगा, ताकि मौसमी बीमारियों से पीड़ित लोगों का समय पर उपचार किया जा सके. मौसमी बीमारियों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश सभी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाईयां और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध करा दिए हैं. प्रदेश के सभी शासकीय अस्पतालों में मांग के अनुरूप पर्याप्त दवाईयां और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता करा दी गई. दवाईयों के उपलब्धता के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से मैनेजमेंट किया जा रहा है.मौसमी बिमारियों के अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत चलने वाले अभियानों को भी संचालयन किया जा रहा है. डॉ सोनवानी ने बताया राजधानी के नगर निगम क्षेत्र में चंगोराभाठा और राजातालाब वार्ड में टाईफाइड के दर्जन भर मरीज मिले थे जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम को कैम्प करने के लिए तैनात कर दिया गया था. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में हैं.जिला अस्पताल पंडरी के सिविल सर्जन डॉ रवि तिवारी ने बताया कि बारिश शुरू होते ही लोग मौसमी बीमारी की चपेट में आने लगे हैं. इसकी वजह से अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है. ग्रामीण क्षेत्र समेत शहर के कुछ क्षेत्रों में सर्दी-बुखार से बच्चे पीड़ित हो रहे हैं.

जिला अस्पताल में एक अलग से वार्ड में एक दर्जन बेड के साथ स्टाफ और डॉक्टरों की तैनाती की गई है. किसी तरह से बिमारी से ग्रस्ति मरीज आने पर तत्काल उपचार शुरु कर दिया जाएगा. वहीं मरीज के हालत में सुधार नहीं होने पर डॉ.अम्बेडकर अस्पताल में रेफर करने एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है. बारिश से ही मौसमी बीमारी के वायरस सक्रिय हो गए हैं. जिला अस्पताल में आपात कालीन में इलाज की पूरी सुविधाएं दी गई. वर्तमान में दोनों अस्पताल का आइसुलेशन वार्ड मौसमी बीमारी के मरीजों से भरा हुआ है. बारिश की वजह से पेयजल का पानी दूषित होने से डायरिया के मरीज ज़्यादा अस्पताल पहुंचते है. अपनी ओर से नगर निगम भी लोगों को शुद्ध जल पीने की हिदायत दे रहा है

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