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सारंगढ: सबको जोड़ कर रखने की ताकत भारतीय संविधान में – राकेश नारायण बंजारे..

सबको जोड़ कर रखने की ताकत भारतीय संविधान में – राकेश नारायण बंजारे..

प्रवीण थॉमस
सारंगढ। भारत की स्वतंत्रता के समय छोटे-बड़े 565 रियासतें थीं। सब रियासतों के अपने अलग-अलग स्वतंत्र कानून व्यवस्थाएं थीं। अगर ये रियासतें एक न हो पाती तो स्थिति कितनी भयावह हो जाती। धन्य है लौह पुरुष सरदार पटेल जी जिनकी सूझबूझ की बदौलत रियासतों का विलिनिकरण हो पाया और देश अखंड भारत के रुप में सामने आया।
इसी तरह पूरे देश में बहुत अधिक विविधता रही है। सांस्कृतिक, भौगोलिक, भाषाई, रीति-रिवाज, परम्पराएँ, धर्म, जाति, वैचारिक कई प्रकार की विविधता से भरे इस देश को किसी एक विधान में बांधना, एक छत के नीचे लाना, जिसमें सभी के हक और अधिकार सुरक्षित रहे। परम्पराएँ और रीति-रिवाज़ सुरक्षित रहे। निश्चय ही हिमालय से भी ऊंचे लक्ष्य रहें हैं और इस लक्ष्य को तमाम कठिनाईयों के बावजूद फतह हासिल हुआ भारतीय संविधान सभा के प्रयासों से।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं संविधान सभा के 284 सदस्यों में वैचारिक मतभेद कायम रहता तो क्या होता? उन्होंने प्रत्येक बिंदुओं पर व्यापक चर्चा करके देश हित में सर्वमान्य हल निकाला। संविधान सभा के सदस्य भी अलग अलग क्षेत्र, भाषाई, धर्म सम्प्रदाय, राजनीतिक दलों, अलग अलग मान्यताओं और अलग अलग वैचारिक पृष्ठभूमि के रहे हैं। इसके बावजूद भी उन्होंने व्यक्तिगत वैचारिक मतभेद को परे हटाते हुए भारतीय संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया तो लक्ष्य केवल एक ही था अखंड भारत का निर्माण। भारत के भविष्य के लिए व्यक्तिगत मान्यताओं, आस्थाओं, परम्पराओं के परे जाकर एक होने का भाव जिसकी बदौलत सत्तर सालों से देश निरंतर प्रगति करते हुए यहाँ तक पहुंचा है।
संविधान निर्माण की परिस्थितियों पर अपने विचार रखते हुए वक्ता एवं युवा साहित्यकार राकेश नारायण बंजारे ने उपरोक्त बातें कही।
रायगढ़ जिले के ग्राम बजरमुड़ा तहसील तमनार में तीन दिवसीय भारतीय संविधान मेला का आयोजन किया गया था। भारतीय संविधान प्रचारिणी सभा के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राकेश नारायण ने आगे कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ भीम राव अंबेडकर द्वारा संविधान सभा में दिए गए वक्तव्य ने सभा में उपस्थित प्रत्येक सदस्य को अभिभूत कर दिया। उनकी बातों में केवल और केवल देश के लिए समर्पण की भावना थी जिसकी सभी सदस्यों ने सराहना की और इस तरह देश के लिए एक उत्कृष्ट संविधान निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन के अथक प्रयास से निर्मित भारतीय संविधान विश्व में अनोखा है। 395 अनुच्छेद 12 अनुसूची और 22 भागों में विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। भारतीय संविधान समानता के साथ साथ समता को भी महत्व देता है। धर्म, लिंग, जाति, जन्म स्थान के भेदभाव को समाप्त करते हुए साथ ही साथ वंचित वर्ग, महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का भी संरक्षण करता है। हमारे सभी अधिकार और कर्त्तव्य संविधान में सुरक्षित हैं। हम भारतीयों की भारतीय संविधान के प्रति अटूट आस्था होनी चाहिए। भारतीय संविधान ही हमारे महापुरुषों के महान कार्यों का प्रताप है जो हमें एकता के सूत्र में बांधे रखता है।
ग्राम बजरमुड़ा में संविधान मेला आयोजन में गुणनिधि नायक जी का विशेष प्रयास रहा। तीन दिवसीय कार्यक्रम का संपूर्ण संचालन भारतीय संविधान प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष एड. श्री धनीराम बंजारे जी द्वारा किया गया। संविधान के अध्ययन अध्यापन पर जनमानस से अपील की गई। कार्यक्रम में आसपास के ग्रामीणों सहित खरसिया, फगुरम से लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम को नीलाराम घृतलहरे, तरुण मिलन, घनश्याम टंडन एवं अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर बहुत से संविधान प्रेमी जागरूक नागरिक गण उपस्थित रहे।

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