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कोसीर: काव्य तरंग ‘अनुपम’- *कवि आनंद सिंघनपुरी…

काव्य तरंग ‘अनुपम’- *कवि आनंद सिंघनपुरी…

कोसीर – काब्य तरंग ‘अनुपम ‘ काब्य संग्रह कवि आनन्द सिंघनपुरी की काब्य संग्रह है जिसकी समीक्षा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शैल चंद्रा जी ने की है उनकी समीक्षा –
कविता क्या है – मानव मन में उठने वाली भावनाओं की तरंगे हैं जो शब्द रूप में ढल कर कविता बन जाती है । शायद इसीलिए कवि आनंद सिंघनपुरी ने अपने काव्य संग्रह का नाम काव्य तरंग ‘अनुपम’ रखा है।
वाकई कविता अभिव्यक्ति की सबसे महत्वपूर्ण विधा है| कविता वह साधन है जिसके द्वारा शेष सृष्टि के साथ मनुष्य के रागात्मक सम्बन्ध की रक्षा और निर्वाह होता है| कवि आनंद सिंघनपुरी ने अपने काव्य संग्रह के माध्यम से अपनी रचना धर्मिता का परिचय दिया है| प्रस्तुत संग्रह की कवितायें विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ शारदा की वन्दना से प्रारम्भ की गई है | कवि की रचनाओं में इन्द्रधनुषी रंगो सी अनुपम और विविध छटायें हैं जो मन को आनंदित करती हैं| कही प्रकृति का चित्रण है तो कही त्यौहारों का उत्साह छलकता हुआ दिखाई पड़ता है तो कहीं देशभक्ति में कवि लीन होता हुआ दिखाई पड़ता है तो कही कवि श्रृंगारिक होकर प्रेम में डूबा हुआ प्रेम-गीत गाता हुआ दिखता है तो कहीं अपनी व्यैक्तिक अनुभूतियों को व्यक्त कर अपना दिल का गुबार कविता में उड़ेलता हुआ नजर आता है इस तरह कवि सिंघनपुरी की कवितओं से मन सुमन नवरसों में डूब कर खिल उठता हैं|
संग्रह की कविता ”कविता क्या है” में कवि के मन में प्रश्न उठता है कि कविता क्या है? कवि इस सन्दर्भ में कहता है –
“कविता ले जाती है उस मुकाम पर,
भावों की अभिव्यंजना लिख लेता कविवर|”
कवि की यह कविता कविता की परिभाषा को रेखांकित करती हुई जान पड़ती है ।
आनंद सिंघनपुरी ने प्रकृति वर्णन में बहुत रूचि दिखाई है |उनकी प्रकृति वर्णन की कविताओं को देखकर लगता है कि कवि को प्रकृति से बहुत प्रेम है|प्रकृति वर्णन के अंतर्गत संग्रह की कवितायें हैं – जीवनराग,प्रकृति का वरदान- हिमांचल,नव दीप्त,वो रंग बिरंगे पक्षी,मौसम बदला,सावन,मधु ऋतु,जलद ज्योतिपिंड,सावन बदली,बरसों बदरा आदि हैं|
कवि ने प्रकृति सम्बन्धी कविताओं में प्रकृति का मनोरम चित्रण किया है|कुछ कविताओं में संस्कृत निष्ठ तत्सम शब्दों के प्रयोग से कविता क्लिष्ट हो गई है| जैसे-
नव दीप्त कान्ति विधुलेखा आई|
बहु नीरव तुषारवृत्ता निशा छाई ||
वो रंग-बिरंगे पक्षी में कवि ने सरल सहज भाषा का प्रयोग किया है|जिससे कविता बहुत सुंदर बन पड़ी है –
कितने मीठे लगते हैं
पक्षियों के गीत |
लगता हैं जैसे
बज रहा कोई संगीत |
कवि ने पर्व त्यौहारों का सुंदर सजीव चित्रण किया है| “पावन त्यौहार”में दीपावली का चित्रण मनमोहक है-
मन में नव ज्योत जगाने आया,
दीपावली का पावन त्यौहार|
व्यतीत हर पहर की घड़ियाँ ,
रोशनी जगाने आई बेशुमार ||
‘दीपपर्व’ की पंक्तियाँ अनुपम है –
नित प्रतिदिन प्रज्वलित दीपों की थाल,
सुखसमृद्धि,धन वैभव,सद्भाव से भरा ताल |
कवि का धर्म है समाज को दर्पण दिखाना तभी तो कहा जाता है ‘साहित्य समाज का दर्पण’है |कवि आनंद सिंघनपुरी ने अपनी कविताओं के माध्यम से देश,समाज का चित्रण किया है|
कवि ने देश के महान विभूतियों का चित्रण किया है| ‘युवाओं के प्रेरणास्रोत’ में स्वामी विवेकानंद जी के व्यक्तित्व के माध्यम से कवि देश के युवाओं को प्रेरित करता है|
मत करो आकांक्षा नेता बनने की
करो कामना सेवा करने की |
अगर चाहते हो स्वामी बनना,
तो सेवक बन करो सेवा राष्ट्र की |
‘गाँधीवादी अन्ना हजारे’ कविता में अन्ना हजारे के प्रेरक व्यक्तित्व का चित्रण है-
छा गये सब के मुखमंडल पर अन्ना हजारे,
हर जगह फिर रहे लोग लगाते इन्हीं के नारे |
कवि ने गुरु की महत्ता को भी प्रतिपादित किया है –
श्री गुरुचरणों में,तेरे शिष्य का नमस्कार,
आपकी ज्ञान की गंगा से हुए भवसागर पार|
‘रामायण प्रसंग’ में कवि ने सम्पूर्ण रामायण को दो दो पंक्तियों के शीर्षक के द्वारा बहुत सुंदर ढंग से चित्रण किया है जो गागर में सागर है| इसी तरह ‘द्रौपदी’ काव्य में द्रौपदी के सुंदर चरित्र का चित्रण किया गया है|सम्राट चक्रधर सिंह कविता सम्राट चक्रधर सिंह को समर्पित है|
संग्रह की कविता ‘आशीष’ एक अच्छी कविता है| जिसमें कवि ईश्वर से आशीष मांगता है-
मैं अपने गीतों में क्या रस भर दूँ,
कि गागर सागर बन जाये |
हर बोलों को क्या धुन दूँ,
कि संगीत का महासागर बन जाये|
‘सौगातें’,’तुम्हारी मुस्कान’,’जख्म’,’कुछ कहना है’,’व्यथित हूँ’ आदि कवितायेँ कवि की व्यैक्तिक अभिव्यक्तियों और श्रृंगारपरक कवितायें है|
‘सौगातें’में कवि अपने प्रिय को सौगात देना चाहता है –
संजों रखा है मैनें,
तेरे लिए सपनों का सौगात |
तू जब आँगन में जब आये
तेरे कदमों तले बिछे रहेंगे,
सितारों की टिमटिमाते नजारें |
प्रिय के कदमों तले सितारों को कवि बिछाना चाहता है|बहुत सुंदर उपमान है| बहुत सुंदर कल्पना है|
‘जख्म’ कविता में कवि की विरह वेदना दिखाई देती है-
और तुम्हारी बिछड़न
मेरे जख्मों पर
नमक छिड़क रही है |
‘काव्य तरंग अनुपम’ की सभी कवितायेँ अच्छी है |कवि आनन्द सिंघनपुरी का यह प्रयास सराहनीय है|मुझे आशा है कि भविष्य में उनकी कवितायें और भी निखर कर अपनी पूरी प्रखरता के साथ पाठकों के समक्ष आयेगी|वे निरंतर अपनी काव्य साधना को साधते रहें|मेरा विश्वास है कि माँ शारदे का वरदहस्त कवि आनन्द सिंघनपुरी को प्राप्त होगा और वे छत्तीसगढ़ महतारी के श्री चरणों में अपनी काव्य धारा का अजस्त्र स्रोत करते रहेंगे|
डॉ शैल चंद्रा
प्राचार्य,वरिष्ठ लेखिका
शास.उच्च.माध्य.शा.,टांगापानी|
रावण भांठा,नगरी

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