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कोरबा: कटघोरा वनमंडल में शासन की योजनाओं का नही हो रहा क्रियान्वयन,पसान परिक्षेत्र में रोपणी के लिए आए हजारों पौधे जंगल मे फेक दिये गए…

कटघोरा वनमंडल में शासन की योजनाओं का नही हो रहा क्रियान्वयन,पसान परिक्षेत्र में रोपणी के लिए आए हजारों पौधे जंगल मे फेक दिये गए…

ब्यूरो रिपोर्टर कोरबा। कटघोरा वनमंडल में पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों में जिम्मेदारी नाम की कोई चीज ही नही है।जिसके कारण शासन की अनेक योजनाएं धरातल पर आस्तित्व में ही नही आ पा रही है।एक ओर शासन द्वारा वनों के विकास हेतु करोड़ों अरबों रुपए पानी की तरह बहाकर योजनाएं संचालित करती है।लेकिन दूसरी ओर जिम्मेदार पद पर बैठे नौकरशाह अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वह नही कर रहे।जिसके कारण अनेक महत्वकांक्षि योजनाएं मौजूदा समय मे जमीदोज होकर रह गई है।वनपरिक्षेत्र पसान में ऐसे ही रोपण के लिए आए सागौन,नीलगिरी सहित हजारो मिश्रित प्रजाति के पौधों को लावारिस हालत में फेंककर नौकरशाहों ने अपने कर्तव्यों का निर्वह कर लिया.

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कटघोरा वनमंडल अंतर्गत पसान परिक्षेत्र के तिलईडाँड़ बीट,कक्ष क्रमांक P 221पत्थरफोड़ जंगल में शासन की ओर से गत जुलाई-अगस्त 2018 में सागौन,नीलगिरी सहित मिश्रित प्रजाति का पौधारोपण होना था।इस कार्य के लिए संबंधित विभाग को हजारों पौधा भी आबंटित हुआ।लेकिन कर्तव्यविमुख अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा पौधारोपण के बजाय उन हजारों पौधों को रोपित किये जाने वाले स्थान पर ले जाकर लावारिश फेंक दिया गया।और इस तरह अधिकारी-कर्मचारियों ने मिलकर अपनी जिम्मेदारियों का पालन कर लिया।मौके पर जब जाकर देखा गया तब सागौन व नीलगिरी के लगभग चार हजार पौधे लावारिस हालत में पड़े मिले।वहीं अन्य पौधें जिनकी पहचान तो नही हो सकी उन पौधों की संख्या भी दो हजार के आसपास थी,जो मौके पर बिखरे पड़े थे।तथा जहाँ पौधारोपण होना था उस स्थान पर घासफूस के अलावा कुछ नजर नही आया।उक्त मामले में पसान रेंजर एन सी शुक्ला से बात करने पर उन्होंने कहा कि रोपणी कार्य के लिए बजट नही आने के कारण पौधारोपण नही कराया गया।अब यहां रेंजर शुक्ला साहब की जवाब से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे अपने कार्यों के प्रति कितने गंभीर है।यदि रोपणी कार्य के लिए शासन से बजट नही आया तब उस स्थिति में पौधों को नर्सरी में रखा जा सकता था।और तब शायद वे तमाम पौधे धूप में पड़े-पड़े सुखकर आज कंटीले ना होते।यदि गौर किया जाए तो विभाग में ऐसे अनेकों योजनाएं संचालित हैं जो धरातल पर दिखते ही नही।और सिर्फ कागजी घोड़ा दौड़ाकर उन योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।जिला प्रशासन का ज्यादा हस्तक्षेप ना होने के कारण पूरा का पूरा कटघोरा वनमंडल अंधेर नगरी-चौपट राजा की तर्ज पर संचालित हो रहा है।यदि इस वनमंडल के तमाम कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो विभाग में करोड़ो रुपए का चौकाने वाला फर्जीवाड़ा कारनामा सामने आएगा.

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