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■ सम्पादकीय – विश्व महिला दिवस विशेष…

सम्पादकीय – विश्व महिला दिवस विशेष…

सास बहू में आखिर क्यों नहीं जमती ?
समाज को आईना दिखाने वाली स्त्री आज खुद से ही जंग लड़ रही है ।आज समाज में स्त्री – पुरुष समानता की बातें से ऊपर उठ गई है स्त्री ऊंची उड़ाने भर रही ।समाज मे सम्मान भी बढ़ा है वही आज भी नारी प्रताड़ना भी झेल रही है ।आज समाज में एक अलग छटपटाहट है स्त्री की जंग खुद स्त्री से है घर के चौखट से दफ्तर तक आज स्त्री कहीं कमजोर दिखती है तो अपने परिवार से ही जंग लड़ते दिखती है ।आज विश्व महिला दिवस पर मेरा स्त्री जगत को नमन ।ग्रामीण परिवेश की छोटा सा एक अनुभव रखना चाहता हूं जो पीड़ा दायक है समाज के लिए समाज में स्त्री कहीं अगर मजाक का शिकार होती है तो अपने विवाह के बाद अपनी सास की चुगली से इस बात को नकारा नहीं जा सकता ? सास और बहू एक परिवार के दो अलग अलग स्तम्भ हैं पर ये दोनों स्तम्भ एक दूसरे के सहयोग के बजाय एक दूसरे के विपरीत काम करते हैं दोनों पक्ष में सम्मानता है दोनों स्त्री हैं फिर भी एक दूसरे की बुराई करने से नहीं चूकते ऐसा आखिर क्यों ? जबकि सास भी पहले बहु का काम सम्हाल चुकी है ।समाज में आज भी बदलाव की जरूरत है ।आज के परिवेश में बहुत कम स्त्री अनपढ़ होंगी अधिकतर स्त्रियां पढ़ी लिखी हैं और उच्च ओहदे में भी अपनी बेबाक जिम्मेदारी सम्हाल रही है और समाज मे मान सम्मान से नाम है पर कहीं न कहीं सास बहू की जो बीच की कड़ी है ओ आज भी सन्देहास्पद दिखती है क्या बहुएं अपनी जिम्मेदारी भूल गई हैं या सासें अपनी कर्तब्य ? यह विषय चिंतनीय है अक्सर दो सास या दो बहुएं आपस में बात करती हैं तो परिवार की उन
बातों चर्चा का विषय बना देती है कि मेरी बहु कुछ काम की नहीं ऐसा क्यों ,वही बहुएं भी अपने – अपने सास के विरुद्ध होती है और एक दूसरे की विरोध में पूरा जीवन खत्म हो जाता है आखिर इस खाई को कैसे भरा जाए सास को कभी माँ की दर्जा मिलेगी क्या बहु को बेटी की इस तरह इस विषय पर गांव से बड़े शहर तक सेमिनार होनी चाहिए । आखिर समाज मे परिवार के ये दोनों स्तम्भ एक दूसरे के विरोध में क्यों है ।वही समाज में पुरुष पर हंसा जाता है कि अपने माँ – बाप का पालन नहीं कर सकता जिस दिन परिवार के ये दोनों पक्ष अपनी जिम्मेदारी को समझ लेते है उस दिन कोई भी माँ बाप अपने परिवार से नहीं टूटेगा ।स्त्री को इस बात पर स्वयं अमल करना होगा तभी समाज में जो विकृतियां हैं समाप्त होगी ।आज विश्व महिला दिवस पर मेरा सादर अभिवादन..
लक्ष्मी नारायण लहरे “साहिल “
युवा साहित्यकार पत्रकार कोसीर

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