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कोसीर: महानदी किनारे बसा गांव सिंघनपुर – पासीद घाट में मेला लगने की आपार संभावनाएं…

महानदी किनारे बसा गांव सिंघनपुर – पासीद घाट में मेला लगने की आपार संभावनाएं…

सिंघनपुर घाट से लौटकर
● लक्ष्मी नारायण लहरे
कोसीरकोसीर मुख्यालय से महज 05 किलो मीटर दूर महानदी किनारे बसा गांव सिंघनपुर – पासीद घाट में मेला लगने की आपार संभावनाएं देखी गयी ।वर्तमान में सिंघनपुर घाट में बैराज बनी है जिसे मिरौनी बैराज के नाम से जाना जाता है जो रायगढ़ जिला और जांजगीर – चांपा जिला को जोड़ती है इस बैराज के बनने से दोनों जिला के लोगों को आने जाने में सहुलियत हुई है इसके पूर्व में सिंघनपुर ,पासीद ,मल्दा,दहीदा, और जशपुर कछार ,ये गांव नाव घाट से जाने जाते थे ,इन गांवों में नाव चलते थे और नदी के उस पार जाने वाले नाव से जाते थे ।आज बैराज निर्माण होने से पूरे अंचल ही नहीं वरन दूर दूर के लोग इस पुल से पार होकर आते जाते हैं ।मकर संक्रान्ति पर जशपुर कछार में एक दिन का मेला भरता है पर इस मेले को भब्य प्रदान करने के लिए ग्राम पंचायत 2- 3 दिन का मेला करा रहे हैं वैसे मकर संक्रांति जशपुर कछार का मेला प्रसिद्ध है पिछले कुछ वर्षों से यहां नेताओं का भी आना जाना हो रहा है पर लोगों की माने तो मेला के स्वरूप में परिवर्तन के साथ गिरावट भी देखी जा रही है ।

 

वहीं सिंघनपुर – पासीद घाट में पिछले वर्ष से मकर संक्रांति पर्व पर लोग यहां स्न्नान कर रहे हैं वही छोटे छोटे दुकान और होटलें लग रही है इस वर्ष 14 जनवरी को लोगों का एक अलग हुजूम दिखा और लोग आस्था के डुबकी लगाते दिखे । वहीं पिकनिक मनाने वालों की भीड़ रही ।सिंघनपुर – पासीद घाट में पर्यटन की आपार संभावनाएं दिख रही है सिंघनपुर और पासीद गांव के सरपंच पहल करते हैं तो इन घाटों पर मिरौनी बैराज पर मेला लग सकता है जो इस बार देखने को भी मिला ।भविष्य में पहल होती है तो जशपुर कछार से भी बड़ा मेला यहाँ लग सकता है जो लोगों को इस ओर आकर्षित कर रहा है ।मिरौनी बैराज बनने से रायगढ़ जिला और जांजगीर जिला के आस पास के गांव के लोग महानदी पहुंचकर अस्थि विसर्जन भी कर रहे हैं।

लोग गंगा न जाकर अब यहीं इन्ही घाटों में पहुंचकर अस्थि विसर्जन कर रहे हैं इस तरह महानदी किनारे बसे गांव सिंघनपुर -पासीद घाट पर लोगों का आना जाना शुरू हो गया है और धीरे धीरे इन घाटों में आस्था से जुड़े लोग जुड़ रहे हैं ।पहल हो तो सिंघनपुर – पासीद घाट एक नए रूप में सामने आ सकता है बस पहल की दरकार है ।

■ लक्ष्मीनारायण लहरे  (पत्रकार)

 

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