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सरिया : मकर संक्रांति पर त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने पहुंचे श्रद्धालु, महाआरती में शामिल हुए विधायक..

मकर संक्रांति पर त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने पहुंचे श्रद्धालु, महाआरती में शामिल हुए विधायक..

देवराज दीपक

सरियाछत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से करीब 40 किमी दूर पोरथ में मकर संक्रांति बड़े ही धूमधाम से मनाई जा रही है। महानदी, मांड और लात नदी का यह त्रिवेणी संगम में इसका खासा असर देखने को मिलता है। पड़ोसी राज्य ओडिशा समेत छग के दूर दराज से हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां त्रिवेणी संगम में स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। इसी क्रम में रविवार सुबह सूरज निकलने से पहले ही यहां पर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। वहीं शाम को महाआरती का आयोजन किया गया। आपको बता दें कि तीर्थस्थल के रूप में पहचान बना चुके पोरथ मेला में पहली बार महाआरती का आयोजन किया गया। जिसमें रायगढ़ विधायक प्रकाश नायक अपने सपरिवार पहुंचे थे।

उन्होंने Sछत्तीसगढ़ खबर न्युज के टीम से चर्चा करते हुए कहा कि पोरथ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग लंबे समय से हो रही हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया कि उनकी ओर से पूरी कोशिश की जाएगी और इसको लेकर वे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी चर्चा करेंगे। बड़े बुजुर्ग इस आयोजन को अपनी पुरानी परंपरा से जोड़कर मानते है। श्रध्दालुओं को यहां ऋषि पत्र के दर्शन, महानदी पर गंगा स्नान, कृष्ण भक्तिभाव से समर्पण गुरुधाम का दर्शन करने को मिलता है। मंदिर के आसपास कई प्राचीन मूर्तियां रखी हुई है जिसे देख कर इस स्थल के पुरातात्विक महत्व का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। इस मेले में ओडिशा, छग के महासमुंद जिले व जांजगीर व कोरबा तक के लोग पहुंचते हैं। मेले की खास बात यह है कि यहां दर्शन और स्नान करने आने वाले भक्तों के लिए रविंद्र भोय की रसोई में 24 घंटे भोजन की व्यवस्था रहेगी। भोजन कराने की सारी जिम्मेदारी उनके शिष्य पोरथवासी ने संभाल ली है। रविवार की दोपहर 12 बजे महाभंडारे की शुरुआत हो गई जिसमें शाम तक ही 20 हजार से ज्यादा लोग भोजन कर चुके थे। ग्रामीणों का अनुमान है 14 जनवरी की दोपहर तक वे 40 हजार से ज्यादा भक्तों को भोजन करा देंगे। इसकी तैयारी उन्होंने पहले से ही मौके पर ही कर रखी है। पोरथ में भंडारा लगाने की तैयारी एक हफ्ते पहले शुरू हुई। गुरु रविंद्र के शिष्यों ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के गांवों में ग्रामीणों के पास गए और उनसे दान में जो भी मिला उसे पोरथ गांव में लाकर दे दिया। भक्तों से मिले चावल, दाल और सब्जी से ही 24 घंटे के महाभंडारे में भक्तों को भोजन कराया जाएगा। महाभंडारे की व्यवस्था पोरथावासी ही संभाल रहे हैं। बुजुर्ग मानिटरिंग कर रहे हैं। युवाओं को भोजन परोसने और बनाने की जिम्मेदारी दी है। सब्जी काटने का मोर्चा गांव की महिलाओं ने संभाल रखा है। महाभंडारे में कोई व्यवधान न आए इसलिए गांव के अन्य लोगों को बारी-बारी से काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बुजुर्ग, युवक व महिलाएं सभी अतिथियों की सेवा मिलकर कर रहे हैं।

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